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Showing posts from April, 2020

GUSTAKE ‎RASOOL ‏KA ‎ANZAM

#गुस्ताख़ ए रसूल ﷺ का #अंजाम  हज़ूरे अक़दस, रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम के सब से बडे दुश्मन और मख़ालिफ अबू लहब के बेटे "उत्बा" की शादी हुजूर अक़दस सल्ल्लाहु अलैहि वस्सलम की शहज़ादी हज़रत उम्मे - कुलसुम रजियल्लाहु तआला अन्हा के साथ हुई थी | उत्बा अपने बाप अबू लहब के बहकावे में आकर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम का सख़्त मुख़ालिफ हो गया |  एक मरतबा उत्बा तिजारत की गरज से मुल्के शाम (सीरिया) जा रहा था, तब उसने कहा था कि मैं हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम के पास जा कर उन्हे सख़्त परेशान करुंगा लिहाजा उत्बा हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम की ख़िदमत मे हाज़िर हुवा और उसने कहा कि मैं कुरआन की आयत (वन्नजमे-इज़ा-हवा) और (सुमा-दना-फ-त-दल्ला) दोनो (आयत सुरह नज्म पारा 27) को नही मानता | बादहू वो नालायक हजूर सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम के जानिब थूका और आप की साहबजादी को तलाक़ दे कर वापिस भेज दिया |  उत्बा की इस मजूकरा मज़मूम हरकत से नाराज़ होकर हजूर ए अक़दस सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम ने बारगाहे रब्बुल इज़्ज़त में बद-दूआ फ़रमाई कि "अय अल्लाह ! तेरे कुत्तों में से एक कुत्ता इस पर मु...

Hadees Quran ki bate

तीन सवालात ✨====✨  (हिस्सा 3)  *★__ बस यह लोग मौका पाकर वहां से बाहर निकले अौर पहाड़ के गार में छुपे क़ौम ने इन्हें हर तरफ तलाश किया लेकिन वह ना मिले अल्लाह ताला ने इन्हें इनके देखने से आजिज़ कर दिया। बिल्कुल इसी कि़स्म का वाकि़या हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम के साथ पेश आया था जब आपने हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु के साथ गारे सौर ने पनाह ली थी लेकिन मुशरिकीन गार के मुंह तक आने के बावजूद आपको नहीं देख सके थे ।इस वाक्य में भी चंद रिवायात में तफसील इस तरह है कि बादशाह के आदमियों में इनका पीछा किया था और गार तक पहुंच गए थे लेकिन गार में वह इन लोगों को नज़र नहीं आए थे । क़ुरआने करीम का ऐलान है कि उस गार में सुबह व शाम धूप आती जाती है । यह गार किस शहर के किस पहाड़ में है यकीनी तौर पर किसी को मालूम नहीं । फिर अल्लाह ताला ने इन पर नींद तारी कर दी , अल्लाह ताला इन्हें करवटें बदलवाते रहे ,इनका कुत्ता भी गार में इनके साथ था। ★_अल्लाह ताला ने जिस तरह अपनी कुदरत ए कामिला से इन्हें सुला दिया था उसी तरह इन्हें जगा दिया । यह 309 साल तक सोते रहे थे अब 309 साल बाद जागे तो बिल्...

Hadees aur Quran ki bate

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*#अल्लाह_की_क़सम_मुझे_इस_बात_का_खौफ_नहीं_है* *#कि_तुम_मेरे_बाद_शिर्क_करोगे* इस मौलवी का दिमाग खराब हो गया है कि उम्मत को मुश्रिक बना रहा है सोचिए, ये बुखारी शरीफ की कुताबुल रुक़्का की रिवायत है इस को बार बार पढ़ें, उम्मत को मुश्रिक ना बनाएं और शिर्को कुफ्र के लोटे भर भर कर उम्मत पे ना मारें ये ज़ुल्म ना करें उम्मत पर, हुज़ूर के भोले भाले गुलामों को शिर्क का धब्बा और दाग ना लगाएं, डरें क़यामत के दिन से जब हर शय खुल कर सामने आ जाएगी क्या जवाब देंगे अल्लाह के सामने ?  अगर कोई मज़ार पर चला जाता है तो शिर्क शिर्क चिल्लाना शुरू कर देते हैं हुज़ूर صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلَّم उहुद के शहीदों के मज़ारात पर नहीं जाया करते थे क्या ? हुज़ूर صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم ने वहां मिम्बर बिछा कर वअज़ नहीं किया-  अजीब सी कहानी है उम्मत के ऊपर शिर्क का इल्ज़ाम लगा देते हैं उम्मत पर शिर्क का इल्ज़ाम मत लगाओ उम्मत मुश्रिक नहीं हो सकती और ये मैंने नहीं कहा खुद आमिना के लाल आक़ा ए रहमत صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم फरमा रहे हैं और आक़ा ‌علیہ السّلام इसको ताकीद के साथ फरमा रहे ह...