अल्लह की कसम मुजे इस बात का खोफ नही है
*#अल्लाह_की_क़सम_मुझे_इस_बात_का_खौफ_नहीं_है* *#कि_तुम_मेरे_बाद_शिर्क_करोगे* इस मौलवी का दिमाग खराब हो गया है कि उम्मत को मुश्रिक बना रहा है सोचिए, ये बुखारी शरीफ की कुताबुल रुक़्का की रिवायत है इस को बार बार पढ़ें, उम्मत को मुश्रिक ना बनाएं और शिर्को कुफ्र के लोटे भर भर कर उम्मत पे ना मारें ये ज़ुल्म ना करें उम्मत पर, हुज़ूर के भोले भाले गुलामों को शिर्क का धब्बा और दाग ना लगाएं, डरें क़यामत के दिन से जब हर शय खुल कर सामने आ जाएगी क्या जवाब देंगे अल्लाह के सामने ? अगर कोई मज़ार पर चला जाता है तो शिर्क शिर्क चिल्लाना शुरू कर देते हैं हुज़ूर صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلَّم उहुद के शहीदों के मज़ारात पर नहीं जाया करते थे क्या ? हुज़ूर صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم ने वहां मिम्बर बिछा कर वअज़ नहीं किया- अजीब सी कहानी है उम्मत के ऊपर शिर्क का इल्ज़ाम लगा देते हैं उम्मत पर शिर्क का इल्ज़ाम मत लगाओ उम्मत मुश्रिक नहीं हो सकती और ये मैंने नहीं कहा खुद आमिना के लाल आक़ा ए रहमत صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم फरमा रहे हैं और आक़ा علیہ السّلام इसको ताकीद के साथ फरमा रहे ह...