GUSTAKE ‎RASOOL ‏KA ‎ANZAM

#गुस्ताख़ ए रसूल ﷺ का #अंजाम 

हज़ूरे अक़दस, रहमते आलम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम के सब से बडे दुश्मन और मख़ालिफ अबू लहब के बेटे "उत्बा" की शादी हुजूर अक़दस सल्ल्लाहु अलैहि वस्सलम की शहज़ादी हज़रत उम्मे - कुलसुम रजियल्लाहु तआला अन्हा के साथ हुई थी | उत्बा अपने बाप अबू लहब के बहकावे में आकर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम का सख़्त मुख़ालिफ हो गया | 

एक मरतबा उत्बा तिजारत की गरज से मुल्के शाम (सीरिया) जा रहा था, तब उसने कहा था कि मैं हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम के पास जा कर उन्हे सख़्त परेशान करुंगा लिहाजा उत्बा हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम की ख़िदमत मे हाज़िर हुवा और उसने कहा कि मैं कुरआन की आयत (वन्नजमे-इज़ा-हवा) और (सुमा-दना-फ-त-दल्ला) दोनो (आयत सुरह नज्म पारा 27) को नही मानता | बादहू वो नालायक हजूर सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम के जानिब थूका और आप की साहबजादी को तलाक़ दे कर वापिस भेज दिया | 

उत्बा की इस मजूकरा मज़मूम हरकत से नाराज़ होकर हजूर ए अक़दस सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम ने बारगाहे रब्बुल इज़्ज़त में बद-दूआ फ़रमाई कि "अय अल्लाह ! तेरे कुत्तों में से एक कुत्ता इस पर मुस्सलत फ़रमा |" 

फिर उत्बा घर आया और सारी हक़ीक़त अपनेे बाप को बताई | इस के बाद बाप बेटे क़ाफले के साथ मुल्के शाम के लिए रवाना हो गए | रास्ते में एक मकाम पर रात बसर करने के लिए पडाव डाला गया, वहा के एक गिर्जा (चर्च) के पादरी ने काफ़ले वालों को आगाह किया कि ये इलाका जंगली जानवरों और वहशी दरिंदो को है | लिहाजा आप लोंग होशियार रहें, पादरी की ये बात सुनकर अबू लहब क़ाफले के लोगों से मुखा़तब हो कर कहता है कि अय कुरैश के लोगो !! मेरी मदद करो, क्यूंकि मुझे मेरे बेटे के हक़ में हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम की की हुई बद-दूआ का डर महसूस हो रहा है | जिस से क़ाफले के लोगों ने अपने सारे के सारे उँटों को उत्बा के इर्द-गिर्द बिठाकर उसे महफूज़ कर दी़या और सारे सो गए  | रात के वक्त एक शेर आया और उसने उँटों के इहाते को बिख़ेर कर सब के मुँह सूँघता हुआ उत्बा तक पहुँचा और उत्बा पर हमला कर के उसे फाडा ख़ाया (कत्ल कर दीया)

हवाला :- (तफ़सीरे रहुलबयान (अरबी) जिल्द 10 सफा 648)

(तफ़सीरे कुरतुबी अरबी  जिल्द 17, सफा 56)

मुन्दर्जा बाला वाक़िआ से साफ मज़कूर है कि शेर ने उंँटों के मुहाशरे को बिखरे दिया और साेये हुए तमामा लोगों के मुँह को सूँघता हुआ उत्बा तक पहुंच गया और उसे फ़ाड ख़ाया | साबित हुआ कि शेर ने सब के मुँह सूँघे थे और उसने हर शख़्स के मुंह की बू आम तरह (नोर्मल)महसूस हुई, लेकिन उत्बा मुँह से नबी की गुस्ताखी की बदबू आई थी और इस बदबू की वज़ह से बही शेर ने पहचान लीया कि यह गुस्ताखे ए रसूल है और उसे के मूंह से आनेवाली गुस्ताखे रसूल की बदबू  की बिना पर फाड़ कर रख दिया 
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