खलील जिब्राइल
खलील व जिब्राईल
Mohammad Musa✍️ ◈❖◈┈─━
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को नमरूद ने जब आग में फेंकना चाहा ! तो जिब्राईल अलैहिस्सलाम हाजिर हुए और अर्ज किया: हुजूर अल्लाह से कहिए वह आपको इस आतिशकदा से बचा ले !
आपने फरमाया: अपने जिस्म के लिए इतनी बुलंद व बाला पाक हस्ती से मामूली सा सवाल करूं ! जिब्राईल अलैहिस्सलाम ने अर्ज किया: तो अपने दिल को बचाने के लिये उससे कहिये !
फ़रमाया: यह दिल उसी के लिये है ! वह अपनी चीज़ से जो चाहे सुलूक करे ! जिब्राईंल अलैहिस्सलाम ने अर्ज किया : हुजूर इतनी बडी तेज आग से आप क्यो नहीं डरते ?
फरमाया: ऐ जिब्राईल यह आग किसने जलाई ?
जिब्राईल ने जवाब दिया: नमरूद ने ।
फ़रमाया : नमरूद के दिल में यह बात किसने डाली ?
जिब्राईल अलैहिस्सलाम ने जबाब दिया : रब्बे जलील ने !
फ़रमाया : तो फिर उधर हुक्में जलील है तो इधर रजाए खलील है ! ( नुजहतुल मजालिस जिल्द 2 सफा 204 ) सबक : अल्लाह वाले हमेशा अल्लाह की रजा में राजी रहते हैं !
*जज़ल्लाहु ख़ैरा*
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