कुर्बानी का बयान

बहार-ए-शरीअ्त की
✍️Mohammad Musa
 रोशनी में
  _उदहीया यानी कुर्बानी का बयान
 
_*📜मसला - 6 : कुर्बानी वाजिब होने का सबब वक़्त है जब वह वक़्त आया और शराइते वुजूब पाये गये कुर्बानी वाजिब होगई और उस का रुक्न उन मख्सूस जानवरों में किसी को कुर्बानी की नियत से जबह करना है कुर्बानी की नियत से दूसरे जानवर मसलन मुर्ग को ज़बह करना ना जाइज है*_

_*📜मसला - 7 : जो शख्स दो सौ दिरहम या बीस दीनार का मालिक हो या हाजत के सिवा किसी ऐसी चीज का मालिक हो जिस की कीमत दो सौ दिरहम हो वह गनी है उस पर कुर्बानी वाजिब है। हाजत से मुराद रहने का मकान और खानादारी के सामान जिन की हाजत हो और सवारी का जानवर और खादिम और पहनने के कपड़े उन के सिवा जो चीजें हों वह हाजत से ज़ाइद हैं।*_

_*📜मसला - 8 : उस शख्स पर दैन है और उस के अमवाल से दैन की मिकदार मुजरा (कटौती) की जाये तो निसाब नहीं बाकी रहती उस पर कुर्बानी वाजिब नहीं और अगर उस का माल यहाँ मौजूद नहीं है और अय्याम कुर्बानी गुजरने के बाद वह माल उसे वसूल होगा तो कुर्बानी वाजिब नहीं*_

_*📜मसला - 9 : एक शख्स के पास दो सौ दिरहम थे साल पूरा हुआ और उन में से पाँच दिरहम जकात में दिये एक सौ पचानवे बाकी रहे अब कुर्बानी का दिन आया तो कर्बानी वाजिब है और अगर अपने जरूरियात में पाँच दिरहम करता तो कुर्बानी वाजिब न होती*_

_*📜मसला - 10 : मालिके निसाब ने कुर्बानी के लिये बकरी खरीदी थी वह गुम हो गई और उस शख्स का माल निसाब से कम हो गया अब कुर्बानी का दिन आया तो उस पर यह जरूर नहीं कि दूसरा जानवर खरीदकर कुर्बानी करे और अगर वह बकरी कुर्बानी ही के दिनों में मिल गई और यह शख्स अब भी मालिके निसाब नहीं है तो उसपर बकरी की कुर्बानी वाजिब नहीं*_

_*📜मसला - 11 : औरत का महर शौहर के जिम्मे बाकी है और शौहर मालदार है तो उस महर की वजह से औरत को मालिके निसाब नहीं माना जायेगा अगर्चे महर मअज्जल हो और अगर औरत के पास उस के सिवा बकद्रे निसाब माल नहीं है तो औरत पर कुर्बानी वाजिब नहीं होगी।*_

_*📜मसला - 12 : किसी के पास दो सौ दिरहम की कीमत का मुस्हफ शरीफ (कुर्आन मजीद) है और अगर वह उसे देखकर अच्छी तरह तिलावत कर सकता है तो उस पर कुर्बानी वाजिब नहीं चाहे उस में तिलावत करता हो या न करता हो और अगर अच्छी तरह उसे देखकर तिलावत न कर सकता हो तो वाजिब है किताबों का भी यही हुक्म है कि उसके काम की है तो कुर्बानी वाजिब नहीं वरना है।*_

_*📕 बहारे शरीअत, हिस्सा 15, सफा 506/507*_

_*📮जारी रहेगा इन्शा'अल्लाह.....*_

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